एवं सर्वेषु भावेषु सर्वसाम्ये व्यवस्थिते ।
तेन सर्वगतं सर्वं शिवरूपं निरूपितम् ॥११०॥
evaṃ sarveṣu bhāveṣu sarvasāmye vyavasthite |
tena sarvagataṃ sarvaṃ śivarūpaṃ nirūpitam
इस प्रकार समस्त भावों में सर्व-समता के व्यवस्थित होने पर, उससे सर्वगत (सर्वव्यापी) सब कुछ शिव-रूप निरूपित किया गया।