Śiva Sūtras · 3.45

Śiva Sūtras 3.45

3.45
भूयः स्यात्प्रतिमीलनम् ॥४५॥
bhūyaḥ syāt pratimīlanam
sūtra
— भूयः — बार-बार, पुनः-पुनः (अव्यय) ; — स्यात् — हो (विधि लिङ्, प्रथम पुरुष, एकवचन) ; — प्रतिमीलन — प्रतिमीलन (दृष्टि का एक साथ भीतर तथा बाहर मोड़ना, सर्वत्र शिव का अनुभव) (नपुं. एकवचन)

बार-बार प्रतिमीलन (दृष्टि का एक साथ भीतर आत्मा की ओर तथा बाहर जगत् को शिव-रूप में देखने का अभ्यास) हो।