भूयः स्यात्प्रतिमीलनम् ॥४५॥
bhūyaḥ syāt pratimīlanam
sūtra
बार-बार प्रतिमीलन (दृष्टि का एक साथ भीतर आत्मा की ओर तथा बाहर जगत् को शिव-रूप में देखने का अभ्यास) हो।
बार-बार प्रतिमीलन (दृष्टि का एक साथ भीतर आत्मा की ओर तथा बाहर जगत् को शिव-रूप में देखने का अभ्यास) हो।