गर्भे चित्तविकासोऽविशिष्टविद्यास्वप्नः ॥४॥
garbhe citta-vikāso 'viśiṣṭa-vidyā-svapnaḥ
sūtra
माया के गर्भ में चित्त का विकास (विस्तार) केवल अविशिष्ट (अपरिष्कृत) विद्या का स्वप्न (मात्र) है।
माया के गर्भ में चित्त का विकास (विस्तार) केवल अविशिष्ट (अपरिष्कृत) विद्या का स्वप्न (मात्र) है।