The Great Liberation Tantra· 3.96 / 153

The Great Liberation Tantra3.96

3.96
पुण्यायन्ते क्रियाः सर्वाः सुषुप्तिः सुकृतायते । स्वेच्छाचारोऽत्र विहितो महामन्त्रस्य साधने ॥९६॥
puṇyāyante kriyāḥ sarvāḥ suṣuptiḥ sukṛtāyate | svecchācāro'tra vihito mahāmantrasya sādhane ||96||
— पुण्य-रूप हो जाती हैं ; — क्रियाएँ ; — समस्त ; — सुषुप्ति ; — सुकृत-रूप हो जाती है ; — स्वेच्छाचार ; — यहाँ ; — विहित है ; — महामन्त्र के ; — साधन में

उसके लिए समस्त क्रियाएँ पुण्य-रूप हो जाती हैं, सुषुप्ति सुकृत-रूप हो जाती है; महामन्त्र के साधन में यहाँ स्वेच्छाचार विहित है।