The Great Liberation Tantra3.79
अनेन ब्रह्ममन्त्रेण भक्ष्यपेयादिकञ्च यत् ।
दीयते परमेशाय तदेव पावनं महत् ॥७९॥
anena brahmamantreṇa bhakṣyapeyādikañca yat |
dīyate parameśāya tadeva pāvanaṃ mahat ||79||
— इससे ; — ब्रह्म-मन्त्र से ; — भक्ष्य, पेय आदि ; — जो ; — अर्पित किया जाता है ; — परमेश को ; — वही ; — पावन ; — महान् इस ब्रह्म-मन्त्र से परमेश को जो भी भक्ष्य, पेय आदि अर्पित किया जाता है, वही महान् पावन हो जाता है।