The Great Liberation Tantra· 3.4 / 153

The Great Liberation Tantra3.4

3.4
किं ध्यानं किं विधानञ्च परेशस्य परात्मनः । तत्त्वेन श्रोतुमिच्छामि कृपया कथय प्रभो ॥४॥
kiṃ dhyānaṃ kiṃ vidhānañca pareśasya parātmanaḥ | tattvena śrotumicchāmi kṛpayā kathaya prabho ||4||
— क्या ; — ध्यान ; — क्या ; — और विधान ; — परेश का ; — परमात्मा का ; — यथार्थ रूप से ; — सुनना चाहती हूँ ; — कृपा से ; — कहो ; — हे प्रभो

उस परेश, परमात्मा का ध्यान क्या है और विधान क्या है? मैं यथार्थ रूप से सुनना चाहती हूँ; हे प्रभो, कृपा करके कहिए।