The Great Liberation Tantra· 3.35 / 153

The Great Liberation Tantra3.35

3.35
मन्त्रचैतन्यमेतत्तु तदधिष्ठातृदेवता । तज्ज्ञानं परमेशानि भक्तानां सिद्धिदायकम् ॥३५॥
mantracaitanyametattu tadadhiṣṭhātṛdevatā | tajjñānaṃ parameśāni bhaktānāṃ siddhidāyakam ||35||
— मन्त्र-चैतन्य ; — यह ; — निश्चय ही ; — उसकी अधिष्ठात्री देवता ; — उसका ज्ञान ; — हे परमेशानि ; — भक्तों के लिए ; — सिद्धि देने वाला

यह मन्त्र-चैतन्य है — उसकी अधिष्ठात्री देवता। हे परमेशानि, उसका ज्ञान भक्तों को सिद्धि देने वाला है।