The Great Liberation Tantra· 3.135 / 153

The Great Liberation Tantra3.135

3.135
उपदेशविधिः प्रोक्तो ब्रह्ममन्त्रस्य कालिके । नात्र पूजाद्यपेक्षाऽस्ति संकल्पं मानसञ्चरेत् ॥१३५॥
upadeśavidhiḥ prokto brahmamantrasya kālike | nātra pūjādyapekṣā'sti saṃkalpaṃ mānasañcaret ||135||
— उपदेश-विधि ; — कही गई ; — ब्रह्म-मन्त्र की ; — हे कालिके ; — यहाँ नहीं ; — पूजा आदि की अपेक्षा है ; — संकल्प को ; — मन से करे

हे कालिके, ब्रह्म-मन्त्र की उपदेश-विधि कही गई; यहाँ पूजा आदि की अपेक्षा नहीं — संकल्प मन से ही करे।