The Great Liberation Tantra· 3.134 / 153

The Great Liberation Tantra3.134

3.134
दक्षकर्णे ब्राह्मणानामितरेषाञ्च वामतः । सप्तधा श्रावयेत् मन्त्रं सद्गुरुः करुणानिधिः ॥१३४॥
dakṣakarṇe brāhmaṇānāmitareṣāñca vāmataḥ | saptadhā śrāvayet mantraṃ sadguruḥ karuṇānidhiḥ ||134||
— दाहिने कान में ; — ब्राह्मणों के ; — और अन्यों के ; — वाम (कान) में ; — सात बार ; — सुनाए ; — मन्त्र को ; — सद्गुरु ; — करुणानिधि

करुणानिधि सद्गुरु ब्राह्मणों के दाहिने कान में और अन्यों के वाम (कान) में मन्त्र को सात बार सुनाए।