The Great Liberation Tantra· 3.117 / 153

The Great Liberation Tantra3.117

3.117
विनाऽयासं विना क्लेशं स्तोत्रञ्च कवचं विना । विना न्यासं विना मुद्रां विना सेतुं वरानने ॥११७॥
vinā'yāsaṃ vinā kleśaṃ stotrañca kavacaṃ vinā | vinā nyāsaṃ vinā mudrāṃ vinā setuṃ varānane ||117||
— बिना ; — आयास ; — बिना ; — क्लेश ; — और स्तोत्र ; — कवच ; — बिना ; — बिना ; — न्यास ; — बिना ; — मुद्रा ; — बिना ; — सेतु ; — हे वरानने

हे वरानने, आयास के बिना, क्लेश के बिना, स्तोत्र और कवच के बिना, न्यास के बिना, मुद्रा के बिना, सेतु के बिना,