The Great Liberation Tantra3.115
भक्ष्याभक्ष्यविचारोऽत्र त्याज्यं ग्राह्यं न विद्यते ।
न कालशुद्धिनियमो न वा स्थाननिरूपणम् ॥११५॥
bhakṣyābhakṣyavicāro'tra tyājyaṃ grāhyaṃ na vidyate |
na kālaśuddhiniyamo na vā sthānanirūpaṇam ||115||
— भक्ष्य-अभक्ष्य का विचार ; — यहाँ ; — त्याज्य ; — ग्राह्य ; — नहीं ; — है ; — नहीं ; — काल-शुद्धि का नियम ; — नहीं ; — अथवा ; — स्थान का निरूपण यहाँ भक्ष्य-अभक्ष्य का विचार नहीं, त्याज्य-ग्राह्य नहीं; न काल-शुद्धि का नियम है, न स्थान का निरूपण।