The Great Liberation Tantra· 3.113 / 153

The Great Liberation Tantra3.113

3.113
द्वात्रिंशता सहस्रेण जपेनास्य पुरस्क्रिया । तद्दशांशेन हवनं तर्पणं तद्दशांशतः ॥११३॥
dvātriṃśatā sahasreṇa japenāsya puraskriyā | taddaśāṃśena havanaṃ tarpaṇaṃ taddaśāṃśataḥ ||113||
— बत्तीस ; — हजार (जप) से ; — इस (मन्त्र) के जप से ; — पुरश्चरण ; — उसके दशांश से ; — हवन ; — तर्पण ; — उसके दशांश से

इस मन्त्र के बत्तीस हजार जप से इसका पुरश्चरण (होता है); उसका दशांश हवन, उसका दशांश तर्पण,