The Great Liberation Tantra3.111
पूजनं यजनञ्चैव स्नानं पानञ्च भोजनम् ।
यद्यत्कर्म प्रकुर्वीत ब्रह्ममन्त्रेण साधयेत् ॥१११॥
pūjanaṃ yajanañcaiva snānaṃ pānañca bhojanam |
yadyatkarma prakurvīta brahmamantreṇa sādhayet ||111||
— पूजन ; — और यजन ; — स्नान ; — और पान ; — भोजन ; — जो-जो कर्म ; — करे ; — ब्रह्म-मन्त्र से ; — सिद्ध करे पूजन और यजन, स्नान, पान और भोजन — जो-जो कर्म करे, उसे ब्रह्म-मन्त्र से सिद्ध करे।