The Great Liberation Tantra· 3.110 / 153

The Great Liberation Tantra3.110

3.110
तदनन्तरमीशानि तन्नो ब्रह्म प्रचोदयात् । इयं श्रीब्रह्मगायत्री चतुर्वर्गप्रदायिनी ॥११०॥
tadanantaramīśāni tanno brahma pracodayāt | iyaṃ śrībrahmagāyatrī caturvargapradāyinī ||110||
— तदनन्तर ; — हे ईशानि ; — 'तन्नो' (वह हमारे लिए) ; — 'ब्रह्म' ; — 'प्रचोदयात्' (प्रेरित करे) ; — यह ; — श्री ब्रह्म-गायत्री ; — चारों पुरुषार्थों को देने वाली

और हे ईशानि, तत्पश्चात् 'तन्नो ब्रह्म प्रचोदयात्' (कहे) — यह श्री ब्रह्म-गायत्री है, चारों पुरुषार्थों को देने वाली।