The Great Liberation Tantra· 3.108 / 153

The Great Liberation Tantra3.108

3.108
एषा सन्ध्या मया प्रोक्ता सर्वथा ब्रह्मसाधने । यदनुष्ठानतो मन्त्री शुद्धान्तःकरणो भवेत् ॥१०८॥
eṣā sandhyā mayā proktā sarvathā brahmasādhane | yadanuṣṭhānato mantrī śuddhāntaḥkaraṇo bhavet ||108||
— यह ; — सन्ध्या ; — मेरे द्वारा ; — कही गई ; — सर्वथा ; — ब्रह्म-साधन में ; — जिसके अनुष्ठान से ; — मन्त्री ; — शुद्ध-अन्तःकरण ; — हो

यह सन्ध्या मैंने ब्रह्म-साधन में सर्वथा कही है, जिसके अनुष्ठान से मन्त्री शुद्ध-अन्तःकरण वाला हो जाता है।