The Great Liberation Tantra· 1.7 / 72

The Great Liberation Tantra1.7

1.7
दिगम्बरं दीननाथं योगीन्द्रं योगिवल्लभम् । गङ्गाशीकरसंसिक्तजटामण्डलमण्डितम् ॥७॥
digambaraṃ dīnanāthaṃ yogīndraṃ yogivallabham | gaṅgāśīkarasaṃsiktajaṭāmaṇḍalamaṇḍitam ||7||
— दिगम्बर को ; — दीनों के नाथ को ; — योगीन्द्र को, योगियों के स्वामी को ; — योगियों के प्रिय को ; — गङ्गा के जल-कणों से सिक्त जटा-मण्डल से मण्डित को

दिगम्बर, दीनों के नाथ, योगियों के स्वामी और प्रिय, गङ्गा के जल-कणों से सिक्त जटा-मण्डल से मण्डित,