The Essence of the Tantra· 9.24 / 53

The Essence of the Tantra9.24

9.24

मन्त्रमहेशस्य स्वरूपत्वे भगवत एकस्यैव प्रमातृत्वे शक्तिशक्तिमद्भेदात् त्रयः

Transliteration (IAST)

mantramaheśasya svarūpatve bhagavata ekasyaiva pramātṛtve śaktiśaktimadbhedāt trayaḥ

— मन्त्रमहेश के स्वरूपत्व में ; — एक भगवान् के ही प्रमातृत्व में ; — शक्ति-शक्तिमत्-भेद से ; — तीन (भेद)

मन्त्रमहेश के स्वरूपत्व में, एक भगवान् के ही प्रमातृत्व में, शक्ति-शक्तिमत्-भेद से तीन (होते हैं)।