The Essence of the Tantra· 7.4 / 28

The Essence of the Tantra7.4

7.4

तस्य अन्तः कालाग्निर् नरकाः पातालानि पृथिवी स्वर्गो यावद् ब्रह्मलोक इति

Transliteration (IAST)

tasya antaḥ kālāgnir narakāḥ pātālāni pṛthivī svargo yāvad brahmaloka iti

— भीतर ; — कालाग्नि (सबसे निम्न लोक) ; — नरक ; — पाताल ; — स्वर्ग ; — ब्रह्मलोक

उसके भीतर कालाग्नि, नरक, पाताल, पृथिवी, स्वर्ग से लेकर ब्रह्मलोक-पर्यन्त (हैं)।