The Essence of the Tantra· 5.14 / 43

The Essence of the Tantra5.14

5.14

विश्राम्यन् भावयेद् योगी स्याद् एवम् आत्मनः प्रथा

Transliteration (IAST)

viśrāmyan bhāvayed yogī syād evam ātmanaḥ prathā

— विश्राम करता हुआ ; — भावित करे — साक्षात् अनुभूत करे ; — योगी ; — आत्मा का प्रथन (विस्तार/उन्मीलन)

उसमें विश्राम करता हुआ योगी (उसे) भावित करे — इस प्रकार आत्मा का प्रथन (विस्तार) होता है।