The Essence of the Tantra· 4.46 / 46

The Essence of the Tantra4.46

4.46

तथैव च उक्तं श्रीपूर्वादौ वितत्य तन्त्रालोकात् अन्वेष्यम्

Transliteration (IAST)

tathaiva ca uktaṃ śrīpūrvādau vitatya tantrālokāt anveṣyam

— इसी प्रकार कहा गया है ; — श्रीपूर्व आदि में ; — विस्तार से ; — तन्त्रालोक से अन्वेषण करना चाहिए

और इसी प्रकार श्रीपूर्व आदि में कहा गया है; विस्तार से तन्त्रालोक से अन्वेषण करना चाहिए।