The Essence of the Tantra· 2.1 / 4

The Essence of the Tantra2.1

2.1

अथ अनुपायम् एव तावत् व्याख्यास्यामः

Transliteration (IAST)

atha anupāyam eva tāvat vyākhyāsyāmaḥ

— अब, अथ (आरम्भ-सूचक अव्यय) ; — अनुपाय — उपाय-रहित मार्ग ; — सर्वप्रथम, उतना तक ; — हम व्याख्यान करेंगे

अब सर्वप्रथम हम अनुपाय (मार्ग) का ही व्याख्यान करेंगे।