The Essence of the Tantra· 19.5 / 7

The Essence of the Tantra19.5

19.5

मुमुक्षोर् अपि तन्मयीभावसिद्धये अयम् जीवतः प्रत्यहम् अनुष्ठानाभ्यासवत्

Transliteration (IAST)

mumukṣor api tanmayībhāvasiddhaye ayam jīvataḥ pratyaham anuṣṭhānābhyāsavat

— मुमुक्षु के लिए भी ; — तन्मयी-भाव की सिद्धि के लिए ; — यह (विधि) ; — जीवित (व्यक्ति) के ; — प्रतिदिन ; — अनुष्ठान-अभ्यास के समान

मुमुक्षु के लिए भी यह तन्मयी-भाव की सिद्धि के लिए (है), जैसे जीवित (व्यक्ति) के प्रतिदिन अनुष्ठान-अभ्यास के समान।