The Essence of the Tantra· 19.3 / 7

The Essence of the Tantra19.3

19.3

ततः परमशिवे योजनिकां कृत्वा तत् दहेत् पूर्णाहुत्या अन्त्येष्ट्या शुद्धानाम् अन्येषाम् अपि वा श्राद्धदीक्षां त्र्यहं तुर्ये दिने मासि मासि संवत्सरे संवत्सरे कुर्यात्

Transliteration (IAST)

tataḥ paramaśive yojanikāṃ kṛtvā tat dahet pūrṇāhutyā antyeṣṭyā śuddhānām anyeṣām api vā śrāddhadīkṣāṃ tryahaṃ turye dine māsi māsi saṃvatsare saṃvatsare kuryāt

— परमशिव में योजनिका (संयोजन) कर ; — उसे (शरीर को) दहन करे ; — पूर्णाहुति से, अन्त्येष्टि से ; — शुद्ध जनों की, अथवा अन्यों की भी ; — श्राद्ध-दीक्षा ; — तीन दिन ; — चौथे दिन ; — मास-मास में ; — संवत्सर-संवत्सर में ; — करे

फिर परमशिव में योजनिका कर, उसे पूर्णाहुति से, अन्त्येष्टि से दहन करे। शुद्ध जनों की, अथवा अन्यों की भी, श्राद्ध-दीक्षा तीन दिन, चौथे दिन, मास-मास में, संवत्सर-संवत्सर में करे।