The Essence of the Tantra· 13.98 / 101

The Essence of the Tantra13.98

13.98

भाविविधिना च मूर्तिचक्रं तर्पयेत्

Transliteration (IAST)

bhāvividhinā ca mūrticakraṃ tarpayet

— आगे (कही जाने वाली) विधि से ; — मूर्ति-चक्र (वंश-मण्डल, परम्परा-चक्र) ; — तर्पण करे

और आगे (कही जाने वाली) विधि से मूर्ति-चक्र (वंश-मण्डल) का तर्पण करे।