The Essence of the Tantra· 13.9 / 101

The Essence of the Tantra13.9

13.9

देहन्यासानन्तरम् अर्घपात्रे अयम् एव न्यासः

Transliteration (IAST)

dehanyāsānantaram arghapātre ayam eva nyāsaḥ

— देह-न्यास के अनन्तर ; — अर्घ-पात्र में (अर्घ्य-पात्र में) ; — यही न्यास

देह-न्यास के अनन्तर अर्घ-पात्र में यही न्यास (किया जाता है)।