The Essence of the Tantra· 13.80 / 101

The Essence of the Tantra13.80

13.80

स्त्रियो वन्ध्यायास् तज्जुगुप्साहेतुं न कुर्यात्

Transliteration (IAST)

striyo vandhyāyās tajjugupsāhetuṃ na kuryāt

— वन्ध्या (निःसन्तान) स्त्री के प्रति ; — उसकी जुगुप्सा (निन्दा) का हेतु ; — न बनाये

वन्ध्या (निःसन्तान) स्त्री के प्रति उसकी जुगुप्सा (निन्दा) का हेतु न बनाये।