The Essence of the Tantra· 13.48 / 101

The Essence of the Tantra13.48

13.48

द्वितीयकलशे विघ्नशमनाय अस्त्रं यजेत्

Transliteration (IAST)

dvitīyakalaśe vighnaśamanāya astraṃ yajet

— द्वितीय कलश में ; — विघ्न-शमन के लिए ; — अस्त्र (मन्त्र) का यजन करे

द्वितीय कलश में विघ्न-शमन के लिए अस्त्र (मन्त्र) का यजन करे।