The Essence of the Tantra· 13.14 / 101

The Essence of the Tantra13.14

13.14

ततो द्वारस्थाने ॐ द्वारदेवताचक्राय नम इति पूजयेत्

Transliteration (IAST)

tato dvārasthāne oṃ dvāradevatācakrāya nama iti pūjayet

— द्वार-स्थान में ; — द्वार-देवता-चक्र को (द्वार के देवताओं के चक्र को) ; — नमः — नमस्कार ; — पूजन करे

फिर द्वार-स्थान में 'ॐ द्वार-देवता-चक्राय नमः' इस प्रकार पूजन करे।