The Essence of the Tantra· 11.14 / 25

The Essence of the Tantra11.14

11.14

निकृष्टमध्यात् तु देहान्तरेण भोगं भुक्त्वा शिवत्वम् एति इति

Transliteration (IAST)

nikṛṣṭamadhyāt tu dehāntareṇa bhogaṃ bhuktvā śivatvam eti iti

— निकृष्ट-मध्य (शक्तिपात) से ; — देहान्तर (दूसरे शरीर) से ; — भोग को भोगकर ; — शिवत्व को प्राप्त करता है

किन्तु निकृष्ट-मध्य से देहान्तर (दूसरे शरीर) से भोग को भोगकर शिवत्व को प्राप्त करता है।