The Essence of the Tantra· 11.12 / 25

The Essence of the Tantra11.12

11.12

अभ्यासवतो वा तदानीं सद्य एव प्राणवियोजिकां दीक्षां लभते सा तु मरणक्षण एव कार्या इति वक्ष्याम इति

Transliteration (IAST)

abhyāsavato vā tadānīṃ sadya eva prāṇaviyojikāṃ dīkṣāṃ labhate sā tu maraṇakṣaṇa eva kāryā iti vakṣyāma iti

— अभ्यासवान् का ; — तब, उस समय ; — प्राण-वियोजिका दीक्षा (प्राण से वियोग कराने वाली) ; — प्राप्त करता है ; — मरण-क्षण में ; — करनी चाहिए ; — हम कहेंगे

अथवा अभ्यासवान् को तब तत्काल ही प्राण-वियोजिका दीक्षा प्राप्त होती है; किन्तु वह मरण-क्षण में ही करनी चाहिए — ऐसा हम कहेंगे।