3.27 कथा जपः ॥२७॥ kathā japaḥ sūtra kathā — कथा — बातचीत (योगी का वचन) (स्त्री. एकवचन) ; japaḥ — जप — जप (मन्त्र की पुनरावृत्ति) हो जाती है (पुं. एकवचन) (उसकी सामान्य) बातचीत ही जप है।