Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 18.73 / 78

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)18.73

18.73
नष्टो मोहः स्मृतिर्लब्धा त्वत्प्रसादान्मयाऽच्युत । स्थितोऽस्मि गतसन्देहः करिष्ये वचनं तव ॥ १८-७३ ॥
naṣṭo mohaḥ smṛtirlabdhā tvatprasādānmayā'cyuta | sthito'smi gatasandehaḥ kariṣye vacanaṃ tava || 18-73 ||
— मोह नष्ट हो गया, स्मृति प्राप्त हुई ; — आपकी कृपा से, मेरे द्वारा, हे अच्युत ; — मैं संदेहरहित होकर स्थित हूँ ; — आपका वचन करूँगा

हे अच्युत, आपकी कृपा से मेरा मोह नष्ट हो गया और स्मृति प्राप्त हो गई; मैं संदेहरहित होकर स्थित हूँ — मैं आपका वचन करूँगा।