3.73 पठित्वा स्तोत्रकवचं प्रणमेत् साधकाग्रणीः ॥७३॥ paṭhitvā stotrakavacaṃ praṇamet sādhakāgraṇīḥ ||73|| paṭhitvā — पाठ करके ; stotrakavacam — स्तोत्र और कवच को ; praṇamet — प्रणाम करे ; sādhakāgraṇīḥ — साधकों में अग्रणी स्तोत्र और कवच का पाठ करके, साधकों में अग्रणी प्रणाम करे (यह कहते हुए:)