The Great Liberation Tantra· 3.73 / 153

The Great Liberation Tantra3.73

3.73
पठित्वा स्तोत्रकवचं प्रणमेत् साधकाग्रणीः ॥७३॥
paṭhitvā stotrakavacaṃ praṇamet sādhakāgraṇīḥ ||73||
— पाठ करके ; — स्तोत्र और कवच को ; — प्रणाम करे ; — साधकों में अग्रणी

स्तोत्र और कवच का पाठ करके, साधकों में अग्रणी प्रणाम करे (यह कहते हुए:)