यथा ब्रह्मोपदेशेन विमुक्तः सर्वपातकैः ।
गच्छन्ति ब्रह्मसायुज्यं तथैव तव साधनात् ॥१५३॥
yathā brahmopadeśena vimuktaḥ sarvapātakaiḥ |
gacchanti brahmasāyujyaṃ tathaiva tava sādhanāt ||153||
जैसे ब्रह्म के उपदेश से समस्त पातकों से विमुक्त होकर (मनुष्य) ब्रह्म-सायुज्य को प्राप्त करते हैं, वैसे ही तुम्हारे साधन से भी (प्राप्त करते हैं)।