The Great Liberation Tantra· 1.65 / 72

The Great Liberation Tantra1.65

1.65
मन्ये तानि महादेव विपरीतानि मानवे । के वा योगं करिष्यन्ति न्यासजातानि केऽपि वा ॥६५॥
manye tāni mahādeva viparītāni mānave | ke vā yogaṃ kariṣyanti nyāsajātāni ke'pi vā ||65||
— मानती हूँ ; — उन (कर्मों) को ; — हे महादेव ; — विपरीत (फल देने वाले) ; — मनुष्य के लिए ; — कौन ; — अथवा ; — योग को ; — करेंगे ; — न्यास से युक्त (कर्मों) को ; — कौन भी ; — अथवा

हे महादेव, मैं मानती हूँ कि वे (कर्म) मनुष्य के लिए विपरीत फल देंगे। कौन योग करेगा, और न्यास से युक्त वे (कर्म) भला कौन करेगा?