The Essence of the Tantra· 6.62 / 82

The Essence of the Tantra6.62

6.62

तत्र विषुवद्दिने बाह्ये प्रभातकाले सपादां घटिकां मध्यमार्गे वहति

Transliteration (IAST)

tatra viṣuvaddine bāhye prabhātakāle sapādāṃ ghaṭikāṃ madhyamārge vahati

— विषुवत् दिन में ; — बाह्य ; — प्रभात-काल में ; — सवा घटिका तक ; — मध्य-मार्ग में ; — बहता है

उसमें बाह्य विषुवत् दिन में, प्रभात-काल में, सवा घटिका तक मध्य-मार्ग में बहता है।