The Essence of the Tantra· 5.10 / 43

The Essence of the Tantra5.10

5.10

अन्तःकृत्य स्थितं ध्यायेद् धृदयानन्दधामनि

Transliteration (IAST)

antaḥkṛtya sthitaṃ dhyāyed dhṛdayānandadhāmani

— अन्तःकृत (आत्मसात्) कर के ; — स्थित रूप में ध्यान करे ; — हृदय के आनन्द-धाम में

अन्तःकृत (आत्मसात्) कर के, हृदय के आनन्द-धाम में स्थित रूप में ध्यान करे।