The Essence of the Tantra· 14.2 / 29

The Essence of the Tantra14.2

14.2

स च विस्तीर्णः तन्त्रालोकात् अवधार्यः

Transliteration (IAST)

sa ca vistīrṇaḥ tantrālokāt avadhāryaḥ

— विस्तीर्ण (पूर्ण रूप) ; — तन्त्रालोक से ; — अवधारित करना चाहिए

और उसका विस्तीर्ण (रूप) तन्त्रालोक से अवधारित करना चाहिए।