The Essence of the Tantra· 13.53 / 101

The Essence of the Tantra13.53

13.53

सावधानेन कर्मान्तं भवितव्यं शिवाज्ञया

Transliteration (IAST)

sāvadhānena karmāntaṃ bhavitavyaṃ śivājñayā

— सावधान — सतर्क ; — कर्म-अन्त-पर्यन्त (अनुष्ठान की समाप्ति तक) ; — रहना चाहिए ; — शिव की आज्ञा से

शिव की आज्ञा से कर्म-अन्त-पर्यन्त सावधान रहना चाहिए।'