Śiva Sūtras · 1.20

Śiva Sūtras 1.20

1.20
भूतसन्धानभूतपृथक्त्वविश्वसङ्घट्टाः ॥२०॥
bhūta-sandhāna-bhūta-pṛthaktva-viśva-saṅghaṭṭāḥ
sūtra
— भूत-सन्धान — भूतों (तत्त्वों) को (उनके सार से) जोड़ना (समासगत स्तम्भ) ; — भूत-पृथक्त्व — भूतों को (रोगादि से) पृथक् करना (समासगत स्तम्भ) ; — विश्व-सङ्घट्ट — और विश्व के (अंगों) के साथ सङ्घट्ट (एकीकरण) — ये सिद्धियाँ (पुं. बहुवचन, समास)

(उसे) भूतों के सन्धान (मिलन), भूतों के पृथक्करण और विश्व के साथ सङ्घट्ट (एकीकरण) की सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं।